छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र राज्य है जहाँ 32% से अधिक आबादी आदिवासी है। इस विशाल जनसमूह के अधिकार, संस्कृति और आर्थिक सशक्तीकरण आज भी प्रमुख मुद्दे हैं।
पाँचवीं अनुसूची के तहत आदिवासी क्षेत्रों में विशेष प्रशासनिक व्यवस्था है। PESA अधिनियम ग्राम सभाओं को व्यापक अधिकार देता है। लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।
वन अधिकार कानून 2006 के बावजूद लाखों आदिवासी परिवार अभी तक वन भूमि के पट्टों से वंचित हैं। खनन और विकास परियोजनाओं के नाम पर विस्थापन जारी है।
जरूरत है कि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जाए। आदिवासियों को उनकी जमीन, जल और जंगल का हक दिया जाए, तभी सच्चा विकास संभव है।