सूरजपुर … जिले में में कानूनी जागरूकता शिविर: छात्रों को सिखाए गए ‘गुड टच-बैड टच’ के सबक और यातायात नियम …
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सूरजपुर की अध्यक्ष व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती विनीता वार्नर के मार्गदर्शन में आज पोस्ट मैट्रिक एवं प्री मैट्रिक बालक छात्रावास में एक विशेष ‘कानूनी जागरूकता कार्यक्रम’ संपन्न हुआ न्यायाधीश श्रीमती अंजलि पाण्डेय ने छात्रों को कानून के विभिन्न पहलुओं से रूबरू कराया
न्यायाधीश ने पॉक्सो एक्ट 2012 की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को अपनी सुरक्षा के प्रति सजग किया। उन्होंने दो छोटे बच्चों को मंच पर बुलाकर बेहद आत्मीयता से ‘गुड-टच और बैड-टच’ के बीच का अंतर समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में डरने के बजाय तुरंत अपने बड़ों को सूचित करें
डिजिटल अरेस्ट और साइबर क्राइम से बचाव
बढ़ते साइबर अपराधों पर चिंता जताते हुए श्रीमती पाण्डेय ने छात्रों को आई.टी. एक्ट के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने ठगी के आधुनिक तरीकों जैसे:
डिजिटल अरेस्ट, पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के जरिए डराना।
KYC ठगी …
बैंक अधिकारी बनकर खाते की जानकारी लेना।
इमरजेंसी फ्रॉड ….
परिवार के सदस्य की दुर्घटना का झूठा डर दिखाकर पैसे ऐंठना …
ब्लैकमेलिंग, अनजान वीडियो कॉल के जरिए फंसाना।
साइबर ठग केवल डर और लालच के दम पर अपराध करते हैं। इनसे डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि सतर्क रहकर इसकी सूचना माता-पिता, शिक्षकों या नजदीकी थाने में देनी चाहिए
यातायात नियम और विधिक सहायता
न्यायाधीश ने मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ड्राइविंग लाइसेंस, बीमा और पंजीकरण दस्तावेजों की अनिवार्यता बताई। उन्होंने चेतावनी दी कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में यह भारी आर्थिक और कानूनी संकट का कारण बन सकता है।
इसके साथ ही, उन्होंने विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत गरीबों और जरूरतमंदों के लिए उपलब्ध निःशुल्क कानूनी सहायता और नालसा के टोल-फ्री नंबर 15100 की सेवाओं की जानकारी साझा की।
